मामला: Abhishek Tyagi Vs. State of U.P. & 3 Others
केस: Criminal Misc. Writ Petition No. 1903 of 2026
न्यायालय: इलाहाबाद हाईकोर्ट
न्यायाधीश: माननीय न्यायमूर्ति संदीप जैन
निर्णय: 10 सितंबर 2026
🔹 मामला क्या था?
याचिकाकर्ता के खिलाफ U.P. Control of Goondas Act, 1970 के तहत कार्रवाई की गई थी। उसके खिलाफ केवल दो आपराधिक मामले बताए गए थे—एक वर्ष 2022 का और दूसरा वर्ष 2025 का। इन्हीं के आधार पर उसे “Goonda” घोषित करते हुए 18.09.2025 के आदेश से अपने स्थायी पते पर रहने और प्रत्येक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को थाने में उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ता ने इस आदेश के खिलाफ Commissioner, Meerut Division के समक्ष अपील की, लेकिन 10.12.2025 को अपील भी खारिज कर दी गई।
🔹 हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने पूर्व के कई निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को केवल एक या दो आपराधिक मामलों के आधार पर “Goonda” नहीं माना जा सकता।
“Habitually” का अर्थ है कि व्यक्ति द्वारा अपराध बार-बार, लगातार और समान प्रवृत्ति के साथ किए जा रहे हों। केवल अलग-अलग और सीमित घटनाएं किसी व्यक्ति को habitual offender साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
कोर्ट ने यह भी दोहराया कि Goonda Act preventive legislation है, punitive नहीं। इसका उद्देश्य habitual criminals से जनता की सुरक्षा करना है, न कि निर्दोष व्यक्तियों को दंडित करना। Act का इस्तेमाल बहुत सावधानी से और स्पष्ट public disorder/public order की स्थिति में किया जाना चाहिए।
🔹 इस मामले में महत्वपूर्ण तथ्य
हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों आपराधिक मामलों की घटनाओं के बीच लगभग 3 वर्ष का अंतर था। कोर्ट के अनुसार यह तथ्य याचिकाकर्ता को habitual offender मानने के विरुद्ध जाता है।
इसलिए कोर्ट ने माना कि केवल इन दो मामलों के आधार पर याचिकाकर्ता को “Goonda” घोषित करना कानूनन टिकाऊ नहीं है।
हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
हाईकोर्ट ने:
- 18.09.2025 का Goonda Act वाला आदेश quash कर दिया।
- 10.12.2025 का appellate order भी quash कर दिया।
- याचिका allow कर दी।
💰 ₹50,000 का हर्जाना
कोर्ट ने इससे भी आगे जाकर याचिकाकर्ता को ₹50,000 damages प्रदान किए। कोर्ट ने कहा कि उसे “Goonda” घोषित किए जाने से उसे suffering और agony हुई। राज्य को यह राशि संबंधित bureaucrats के वेतन से recover करने की liberty भी दी गई। राशि एक महीने के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया गया।
🎯 मुख्य कानूनी सिद्धांत
“केवल एक या दो आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को Goonda नहीं कहा जा सकता; Goonda Act के लिए habitual और repeated criminal conduct का आधार होना आवश्यक है।”
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https://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/WebDownloadJudgmentDocument.do?judgmentID=13718073
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